रुपए की मार झेल रहे निर्यातकों को एक और सौगात

सरकार ने रुपए की मजबूती की मार झेल रहे निर्यातकों को कुछ और राहत देते हुए शनिवार को तीन नई कर योग्य सेवाओं पर उन्हें सेवाकर रिफंड देने व निर्यात ऋण पर ब्याज में दो प्रतिशत छूट का दायरा एवं अवधि दोनों ही बढ़ाने का एलान किया।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक सरकार ने तीन सेवाओं – साधारण बीमा, तकनीकी परीक्षण और निरीक्षण व प्रमाणीकरण के लिए निर्यातकों द्वारा भुगतान किए गए सेवा कर को रिफंड करने का फैसला किया है। इस बारे में शनिवार को अधिसूचना जारी की गई। नई सुविधाएं तुरंत प्रभाव से लागू हो गई हैं।

क्या हैं नई सुविधाएं?
1. विशेष कृषि और ग्रामोद्योग योजना: कृषि और ग्रामोद्योग उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष कृषि और ग्रामोद्योग योजना का विस्तार करते हुए योजना का इस साल का बजट 200 से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

2. ईईएफसी आय पर ब्याज : निर्यातकों की एक्सचेंज अर्जित विदेशी मुद्रा (ईईएफसी) आय पर अब कुछ शर्तो के साथ ब्याज देने का फैसला किया गया है। निर्यातक की 10 लाख डालर तक की बकाया निर्यात आय पर यह ब्याज दिया जाएगा। ब्याज दर बैंक तय करेगा। यह सुविधा अगले एक साल के लिए होगी। ईईएफसी खाता बिना ब्याज वाला खाता होता है।

3. निर्यात ऋण पर ब्याज में रियायत : शिपमेंट से पहले और बाद में लिए गए निर्यात ऋण पर ब्याज में दो प्रतिशत रियायत की सुविधा अब दिसंबर के बजाय अगले साल मार्च तक मिलती रहेगी। यह सुविधा सभी लघु एवं मझौली इकाइयों के साथ कपड़ा, कृषि, इंजीनियरिंग और खेल सामान के बड़े निर्यातकों को दी गई थी। अब इसमें कुछ नए क्षेत्र जोड़े गए हैं: * कपड़ा क्षेत्र में हाथकरघा, रेडीमेड गार्मेट के साथ-साथ पटसन और कालीन निर्यातकों को भी शामिल किया गया है। * प्रसंस्कृत कृषि निर्यात उत्पादों में काजू, कॉफी और चाय निर्यातकों को भी इस सुविधा का लाभ मिलेगा। * सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टेड खल, प्लास्टिक और लिनोलियम निर्यातकों को भी निर्यात ऋण पर ब्याज में दो प्रतिशत छूट उपलब्ध होगी।

रुपया नौ साल की ऊंचाई पर
पूंजी अंतरप्रवाह में तेजी के चलते रुपया मार्च 1998 के बाद से सर्वाधिक ऊंचाई पर है। गुरुवार को रुपया 39.36 रुपए प्रति डालर के स्तर पर बंद हुआ था। बीते सप्ताह में एक प्रतिशत मजबूत हुआ है जबकि चालू वर्ष में अभी तक अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 12 प्रतिशत चढ़ चुका है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें घटाने के बाद इसमें 2.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है।

क्या है नुकसान :
रुपए की मजबूती के कारण निर्यातकों के लाभ के मार्जिन पिछले साल के 24 फीसदी के मुकाबले 18 फीसदी रह गए हैं। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान 160 अरब डालर निर्यात का लक्ष्य तय किया है। विश्लेषकों का कहना है कि रुपए की तेजी के चलते इस लक्ष्य को हासिल कर पाना मुश्किल हो सकता है।

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