तय करें दिशा

आज करियर के तमाम विकल्प हैं। पर युवा प्राय: करियर चयन को लेकर दुविधा में रहते हैं। आइए जानते हैं मनपसंद करियर चुनने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

किसी भी युवा को उसका मनपसंद करियर मिलना काफी महत्वपूर्ण होता है। लेकिन ऐसा हर किसी को नहीं मिल पाता। मेट्रो शहरों, महानगरों और बड़े शहरों में रहने वाले अधिकांश युवाओं की यह इच्छा तो काफी हद तक पूरी हो जाती है, लेकिन छोटे शहरों या कस्बों में निवास करने वाले बहुत कम युवाओं की यह इच्छा पूरी हो पाती है। इसके लिए यह कतई न मानें कि ऐसा अनायास हो जाता है या किसी-किसी की किस्मत बहुत अच्छी होती है।

इस बात का रोना भी बेमानी है कि हमारे शहर में मन-मुताबिक सुविधाएं नहीं हैं और हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि बाहर जाकर पढ़ सकूं या ट्रेनिंग ले सकूं। यदि आपका विजन स्पष्ट है और लक्ष्य की दिशा में पूरी ईमानदारी एवं मेहनत से आगे बढ़ते हैं, तो कोई ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती। दरअसल, किसी को उसका मनपसंद करियर यूं ही नहीं मिल जाता। इसके पीछे उसकी और उसके गार्जियन की सोच, रुचि का क्षेत्र चुनना, सही समय पर सही दिशा में उठाया गया कदम, लगन एवं कठिन परिश्रम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनमें से सभी पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है।

अभिभावक की भूमिका

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में अभिभावकों का अपने बच्चों की शिक्षा और उनके करियर के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। बच्चों के रुझान को देखते-समझते हुए गार्जियन दसवीं-बारहवीं के दौरान उसके करियर की दिशा तय कर लें।
ध्यान रखें, कभी भी बच्चे की रुचि के विपरीत क्षेत्र न चुनें। यदि आप खुद पसंद का क्षेत्र उस पर थोपते हैं, तो शायद वह उसमें बेहतर प्रदर्शन न कर पाए। यह भी हो सकता है कि वह उस क्षेत्र में फ्लॉप हो जाए। ऐसी स्थिति में समय हाथ से निकल जाने पर वह आप को ही कोसेगा।

बनाएं योजना

करियर की दिशा तय हो जाने के बाद उसे पाने के लिए योजना बनाएं। यह योजना व्यावहारिक होनी चाहिए। आप जिस क्षेत्र में अपने बच्चे का करियर बनाना चाहते हैं, उसकी पृष्ठभूमि पहले ही तैयार करनी होगी। मान लीजिए कि आप इंजीनियरिंग या मेडिकल का क्षेत्र चुनते हैं, तो इसके लिए दसवीं-बारहवीं में बुनियादी विषयों पर उसकी फंडामेंटल समझ को मजबूत कराएं। इसके लिए हो सके, तो सक्षम विशेषज्ञ से टयूशन भी दिलाएं। इसके अलावा बच्चे को इस तरह डेवलप करें, ताकि वह पढ़ाई को बोझ न समझते हुए उसे इंज्वॉय करे। इस तरह जब वह पढ़ाई में डूबेगा, तो उसकी जिज्ञासा बढ़ती जाएगी और वह अपने आप आगे बढ़ेगा।

चुनें सही संस्थान

दसवीं-बारहवीं (आवश्यकतानुसार) के बाद जिस संस्थान में बच्चे का एडमिशन कराना चाहते हैं, उसका चयन सोच-समझ कर करें।
संस्थानों के ग्लैमर से प्रभावित होने के बजाय उनके प्रदर्शन को ध्यान में रखें। यह देखें कि वहां से निकले छात्रों की सफलता का अनुपात क्या है, जॉब मार्केट में उनकी वैल्यू कितनी है? सरकारी या निजी क्षेत्र का कोई भी संस्थान हो, उसके माहौल, कोर्स, फैकल्टी आदि की जांच-परख करें।

अन्य प्रमुख बातें

लसंस्थान से निकलने के बाद या कैंपस सेलेक्शन के दौरान कंपनी का रेपुटेशन देखकर उसे ज्वाइन करें। लमार्केट में जॉब सर्च करने के दौरान छोटी-बड़ी नौकरी पर न जाते हुए ऐसी कंपनी चुनें, जहां वर्किग कंडीशंस बेहतर हों और जहां आपको व्याहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिले।
अरुण श्रीवास्तव

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